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शब्दमहल

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parveen dutt sharma


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परिवर्तन जरूरी है…

Posted On: 6 Dec, 2014  
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मत रूठो मॉनसून ….

Posted On: 28 Jun, 2014  
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साम्प्रदायिकता (लघुकथा)-contest

Posted On: 29 Jan, 2014  
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प्रेम कहानी (contest)

Posted On: 28 Jan, 2014  
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हे भगवान् आडवानी जी को सदबुद्धि दे

Posted On: 14 Sep, 2013  
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हिंदी का चिंतन या पाखंड -“Contest”

Posted On: 10 Sep, 2013  
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Contest Others हास्य व्यंग में

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अब जंग होनी चाहिए

Posted On: 12 Jan, 2013  
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चुप रहो, सुख से जीयो

Posted On: 29 Aug, 2012  
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Others न्यूज़ बर्थ मस्ती मालगाड़ी में

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विपक्ष में मानसून…

Posted On: 27 Aug, 2012  
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Others मस्ती मालगाड़ी में

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सावधान देश जश्न मना रहा है (व्यंग्य)

Posted On: 13 Aug, 2012  
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4 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा:

के द्वारा:

त्रिपाठी जी, शायद आप मेरी बात नहीं समझ पाए. मेरा सिर्फ इतना कहना है कि मंदिर में चढ़ावा या अन्य चन्दों से आने वाली राशि की कोई तो सुरक्षा हो. सत्यसाई के देहावसान के बाद जिस तरह उनके निजी कक्ष से भारी मात्रा में नकदी और आभूषण मिले है..उनका क्या मतलब है? क्या वे ट्रस्ट के खाते में जमा नहीं होने चाहिए थे. मैं खुद भी आस्तिक हूँ, लेकिन आस्था के नाम पर मन्दिर-मठों में धन का जो खुला खेल चल रहा है..वह मेरी समझ से बहार है.मैंने कभी ये नहीं समझा की मैं बुद्धिमान हूँ और जनता भोली...रही बात पद्मनाभ मन्दिर की तो भगवान् पद्मनाभ को मेरा प्रणाम...और मेरे लेख में पद्मनाभ मन्दिर का कोई जिक्र ही नहीं है. आप ठीक कह रहे हैं की बगुले और हंस को एक नजर से नहीं देखा जा सकता, लेकिन त्रिपाठी जी आजकल बगुले ज्यादा दिखाई पड रहे हैं और हंस कम...जी हाँ आजकल संतों पे लांछन लग रहे हैं और इससे भारत की गौरवशाली ऋषि-मुनि वाली सभ्यता भी शक के घेरे में आ रही है...मेरा इतना ही कहना है...लेख पढने के लिए आभार....

के द्वारा:

प्रवीण जी क्षमा चाहता हूँ कटु सत्य के लिए किन्तु जब भी कोई पाठक अपना समय देकर किसी लेखक के लेख तक आता है तो उसे किसी मौलिक विचार अथवा शोध पूर्ण तथ्य की आशा होती है किन्तु आपका यह लेख अखबारों न्यूज चैनलों के विचारों और शब्द श्रंखलाओं की ही हूबहू प्रस्तुति मात्र है जिन्हें सुन-सुनकर या पढ़-पढ़कर हम बोर हो चुके हैं...... पुनश्च, आपकी भोले विश्वास पर मुझे आश्चर्य होता है कि आपकी नजर में मंदिर ट्रस्ट कमेटियां सब बेईमानों से भरी पड़ी हैं और सरकार में दूध के धुले निष्काम महापुरुष बैठे हैं जिनके हाथ में आप मीडिया के घाघों की भांति मंदिर प्रबंधन सौंपने की सलाह दे रहे हैं.! मंदिर में कितना चढ़ावा आ रहा है और उसकी वार्षिक आय कितनी है यह बताने के साथ-साथ क्या आपने यह बताने की आवश्यकता नहीं समझी कि जिन मंदिरों संतों के नाम आपने गिनाये उनके द्वारा इन संपत्तियों से जनकल्याण के कितने कार्य हो रहे हैं..? संतों के उपदेश यदि आपको लुटेरों के वाक्य नजर आयें तो आप निस्संदेह वहां मत जाएँ किन्तु आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आपको करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विवेक को मूर्ख बताने का अधिकार नहीं देती| जनता भोली भली मूढ़ है और आप बुद्धिमान.., क्षमा चाहूँगा कहने के लिए किन्तु यह आपका स्वयं की सोंच पर अति आत्मविश्वास ही है| ऋषिमुनियों के देश में संतों पर लांछन लग रहे हैं इसका पद्मनाभ स्वामी संपत्ति से सम्बन्ध नहीं है जिसे राजवंश ने अपनी श्रद्धा से समर्पित किया था और न ही उन संतों के आश्रमों ट्रस्ट से जिनकी छवि निष्कलंक है| बगुले और हंस को एक नजर से नहीं सखा जा सकता|

के द्वारा: vasudev tripathi vasudev tripathi

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: parveensharma parveensharma

praveenji vastav meie aapney sahi likha hai ki dharm ke dekhedaroon ko ek sabak sahi mila aur ek karra sa tahappd bhi pada jin longono ne 60 saal se iss case ko lada woh bhi haargaye unnka kahana ki hey prabhu, hey allaha ab jo court ka fasila woh hi sahi hai per nahi desh ke thekdar unki to maano unka khanaa kharab ho gaya unhoney apna dharm plat dala muslaman bhaio ko kaha yeh faisla thik nahin per yeh kaya unki awaz ko kisi ne nahi sunna kisi ne kis ko aankhan nahi dikhai talwar nahi dikhai bandook ki goli nahi dikhai netaji peresaan inke likye badnami li per yeh bhi ab so rahey hai cheekey dhadhey dhirey se awaz aayi kanoon hi ek ashra hai ladtey raheynegey per ab ek dusrey ghar nahi jalaynegey tumhrey hathyar tum hi rakho hum to ab ek dusrey ko galey lageyengey kyun ram aur allah ke naam zindagi ko khoon ki talwar se sanney agar kuch karna hai thekeydaaron to border per jaaker dushmano se morcha lo ab desh ke ram rahim aur kabir ki baniyono ko sunno bahi bhai ko galey lagey ne do dharm ke thekadoron ke muhh per taley se padd gaye hain thagey se rah gaye hain kya karien aag ugalti jawan ko kahan jalayein ab jo yeh kholi aur boli to khud jalkar rahjayegi iss liye chup rahana hi thick haiek netaji ke pass kuch t.v.wale gaye unhoney puch aapko iss fasiley per kuch kahana hai boley bhai thik nahi laga per unhey jab koi tabjoh nahi mili bhigi billi miahau hogey unhoney to waqut per apni dukan bahut badi failaney ki kosish kari hui per koi bhi dukan ka samman nahi kharida balki awaz aayi hey ram shant hain hum shanti baaney ka mauka dena tabhi dusri taraf ek netaji ji bahut bahdkey unke boleney ka maksad tha unki dukan samprikdyata ko kosney walon ki akeli nahi bahut lambhi hai per yeh kya unki dukan ka saman to koi khirdney ko tyaar hi nahi garak to kya unke bhai bandh bhi unki dukandari meie saat nahi deyrahe kas aagey bhi dukan ka chalna band ho aur ram hi ab sab ki duakn to ghar gharsthi shantike saath chalne do jai sharee ramnetaji thgey se rah gaye hum kis ko gaaliyan dein bhagwan ko ya nayaay ko kahan yeh maal khappayein padosi desh bhi to in hathyarron ko nahi kharidega unkeyaha to aur alg type ke thekeydaar hamrey yah log budhimandh hogey hai hum hi bebquff hain hamari roti per ram ne latt mar di aur bachai kuchi allaha se thokar lagg gayi ki ko apna kahaey kis ko parya hum to uss tahreey se ho gaye jaise dhobi ka kutta na ghar na ghat ka , idhar kuan udhar khai kis ko kaheney apna maa baap hamara bhaivasay hi andhar meie dundh rha hai ek roshnai koi humaey raha dikhaio bhai bahi ho gaya dost dost ho gaya humey kahin ka nahi chod gaya hum bhagwan se yahi prayer kartein hain abhi bhi deyr nahi hai aagey aney wale faisley ko hum apney dhar dhar hatiyoron ka mauka prayog karney ko dey per kaya aise hoga yeh sochney wali baat hai abu hum pahaley patther proyog karlenegey phoolper kabaza karleynegry phir dekhengey hamarey bhiavesay per koi ? kaise lagegey jab tak hum hain ram rahim ek na honey dengey yahi hamrai bhiavsay hai yahi hamari roti hai

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के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: Nikhil Nikhil

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के द्वारा: Astrologer DHIRAJ KUMAR (An Engineer) Astrologer DHIRAJ KUMAR (An Engineer)

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प्रिय शर्मा जी आपने अपने लेख मे जो लिखा उसको इस आलोक मे देखे। एक किसान की फसल मे चूहे फसल को नुकसान कर रहे थे। किसान परेशान होकर उस फसल को बचाने के लिये फसल मे चूहामार दवा डाल दिया कुछ दिन बाद सारे चूहे मर गये। कुछ साधू जो गणेश जी के भक्‍त थे उन लोगों को किसान का यह कार्य बुरा लगा। लेकिन जब आप किसान की जगह रख कर देखेंगे तो आपको भी लगेगा कि किसान के पास इसके सिवाय कोई रास्‍ता नही था। उसी प्रकार नितीश कुमार के पास भाजपा का विरोध करने के अलावा कोई रास्‍ता नही था। जैसा कि आपको भी मालूम है विहार मे विधान सभा का चुनाव होना है वि धान सभा चुनाव मे विहार मे मुस्लिम मतदाता महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करेगें। ऐसी स्थिति मे मुसलमानों को कांग्रेस और राजद की ओर जाने की जोखिम नितीश कुमार नही उठा सकते थें सो उन्‍होने ऐसा किया। कौन कहता है कि नितीश कुमार भाजपा विरोधी हैं। चुनाव बाद अगर उनका गठबंधन पुन: सत्‍ता मे आता है तो वे उसके साथ सरकार बनाएंगें और चलोगें। अगर भविष्‍य मे उनका गठबन्‍धन पुन: केन्‍द्र मे सरकार बनाती है तो नरेन्‍द्र मोदी के साथ सरकार मे सामिल होंगे। जब चूहे की पूजा करनी होगी तो उसे पूजेगें भी लेकिन फसल को बचाने के लिये अगर चूहे को बचायेंगें तो खाये बिना मर जायेगें। रामनीति ही उनकी फसल है उसे बचाने के लिये अगर उन्‍हे चूहे को मारना पडें तो उसको भी करेगें। अब सोचना हमे है कि हम इस नकली धर्मनिपेक्षता के पीछे पीछे कितने दिन भागते रहते हैं। अनुराधा चौधरी भारत उदय मिशन से।

के द्वारा:

मिश्रा जी,मैं बिहार से ताल्लुक रखती हूँ,और नितीश जी द्वारा किये गए अच्छे कामों की जानकारी मुझे अपने पुराने संपर्कों के माध्यम से मिलती रहती है,नितीश जी द्वारा कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र मैं किये गए कार्यों की मैं प्रसंशा करती हूँ लेकिन विकास के नाम पर ही नितीश जी को वोट मिलते हैं,उनको ओछी राजनीतिक हरकतें करते हुए दुःख हुआ,अब तो आप विकास की राजनीति ही करते रहें नितीश जी उसीसे बिहार का भला होगा जैसे नरेन्द्र मोदी गुजरात के विकास की राजनीति करते हैं,छद्म-धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करने के लिए बहुत से लोग हैं जिन्होंने बिहार को बर्बाद करके रखा था जिनको जनता ने कूड़ेदान मैं डाल दिया ,और {बिहार की} जनता को विकास चाहिए,जनता फालतू की राजनीति करने वालों को कूड़ेदान मैं डाल देगी ,कहीं ऐसा न हो की आपको 'न माया मिले न राम' की स्थिति से गुजरना पड़े,

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